
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। कम खर्च में यात्रा और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से राहत के कारण बड़ी संख्या में लोग ईवी को अपना रहे हैं। हालांकि, इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने या बैटरी फटने की घटनाएं भी कभी-कभी सामने आती हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर चार्जिंग के समय या चलते हुए बैटरी में आग लगने की वजह क्या होती है। इसके पीछे एक वैज्ञानिक प्रक्रिया जिम्मेदार होती है।
इलेक्ट्रिक स्कूटर में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी कई छोटे-छोटे सेल्स से मिलकर बनी होती है। जब किसी कारण से बैटरी का कोई एक सेल जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है और उसकी गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, तो थर्मल रनवे की स्थिति बन सकती है।
इस प्रक्रिया में बैटरी के अंदर रासायनिक प्रतिक्रियाएं तेज हो जाती हैं। तापमान लगातार बढ़ने लगता है और एक सेल की गर्मी दूसरे सेल तक पहुंचने लगती है। अगर समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो पूरी बैटरी ओवरहीट होकर आग पकड़ सकती है। गंभीर स्थिति में बैटरी ब्लास्ट होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
बैटरी में आग लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। खराब गुणवत्ता वाली बैटरी, कमजोर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), लंबे समय तक लगातार चार्जिंग और नकली या गैर-ओरिजिनल चार्जर का इस्तेमाल खतरे को बढ़ा सकता है।
इसके अलावा दुर्घटना के दौरान बैटरी को अंदर से नुकसान पहुंचने पर भी बाद में समस्या पैदा हो सकती है। तेज गर्मी में स्कूटर को लंबे समय तक खड़ा रखना या अधिक तापमान वाली जगह पर चार्ज करना भी बैटरी को नुकसान पहुंचा सकता है।
बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) इलेक्ट्रिक स्कूटर की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यह बैटरी के तापमान, वोल्टेज और चार्जिंग प्रक्रिया पर लगातार नजर रखता है।
BMS जरूरत पड़ने पर ओवरचार्जिंग को रोकता है और बैटरी के सभी सेल्स के बीच संतुलन बनाए रखता है। अगर BMS सही तरीके से काम नहीं करता है, तो बैटरी ज्यादा गर्म हो सकती है, जिससे शॉर्ट सर्किट और थर्मल रनवे जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
सही देखभाल, सुरक्षित चार्जिंग और समय-समय पर जांच कराने से इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। साथ ही आग लगने या ब्लास्ट जैसी घटनाओं का खतरा भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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