
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और यह संघर्ष उनकी इच्छा के विपरीत शुरू हुआ। इलाही ने कहा कि बातचीत के दौरान ही उन पर हमला किया गया, जिससे मौजूदा युद्ध की चिंगारी भड़की।
ईरान ने अपनी भूमिका साफ की
एएनआई के साथ बातचीत में डॉ. इलाही ने बताया कि वैश्विक संकट ईरान की वजह से नहीं, बल्कि दूसरे पक्ष की कार्रवाई के कारण उत्पन्न हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान दूसरों की पीड़ा, गैस या तेल की कमी से संतुष्ट नहीं है, लेकिन अपने देश की सुरक्षा बनाए रखना भी जरूरी है।
वैश्विक नेताओं से अपील
इलाही ने दुनिया के नेताओं से आग्रह किया कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका पर दबाव डालें और इस संघर्ष को रोकें। उनका कहना था कि वैश्विक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि लोग पीड़ित न हों और युद्ध को समाप्त किया जाए।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्पष्ट संदेश
इलाही ने कहा कि भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवागमन की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने भारतीय जहाजों के मार्ग को सुनिश्चित करने की कोशिश की।
जवाबी हमलों और अमेरिकी ठिकानों पर इलाही की प्रतिक्रिया
डॉ. इलाही ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान के जवाबी हमलों की आलोचना पर कहा कि अमेरिका ईरान से हजारों मील दूर स्थित ठिकानों का उपयोग युद्ध के लिए कर रहा है। उन्होंने अमेरिकी सीनेटरों से सुना कि अमेरिका ने ईरान के आसपास 45 ठिकाने स्थापित किए हैं। इलाही ने बताया कि ईरान ने अपने पड़ोसियों से कहा था कि वे अमेरिका को इन ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि बहरीन से दागी गई मिसाइलों में 175 निर्दोष लोग मारे गए और ऐसे हमलों से निपटने के लिए ईरान को अपनी रक्षा करनी पड़ रही है।
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