
वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत उत्तर प्रदेश के लिए जीएसटी संग्रह के मोर्चे पर बेहद सकारात्मक रही है। अप्रैल माह में राज्य ने 10,178 करोड़ रुपये का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह दर्ज करते हुए देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है। इस प्रदर्शन के साथ यूपी ने कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। पहले स्थान पर महाराष्ट्र रहा, जहां 22,929 करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया।
जीएसटी नेटवर्क (GSTN) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में पूरे देश में रिकॉर्ड 2.42 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह हुआ, जो अब तक का सबसे अधिक मासिक आंकड़ा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग में वृद्धि, आयात में तेजी और बेहतर कर अनुपालन इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, एक्सप्रेसवे आधारित औद्योगिक गलियारों का विस्तार, एमएसएमई सेक्टर की मजबूती और डिजिटल टैक्स सिस्टम के प्रभाव से कर आधार लगातार मजबूत हो रहा है। नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ और पूर्वांचल के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते व्यापारिक गतिविधियों ने जीएसटी संग्रह को गति दी है।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए हुए निवेश अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं, जिसका सीधा असर राजस्व संग्रह पर पड़ रहा है। आने वाले महीनों में नई औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने से जीएसटी संग्रह में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
राज्य कर विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में पोस्ट सेटलमेंट एसजीएसटी संग्रह में 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बेहतर कारोबारी माहौल और कर प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है।
Join the conversation — your email will not be published.
Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.