
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर, पाइन गैस और जग वसंत, होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर चुके हैं। सोमवार दोपहर इन्हें ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के बीच देखा गया, जहां संभवतः उन्होंने ईरानी अधिकारियों को अपनी पहचान स्पष्ट की।
ये दोनों जहाज उन 28 भारतीय जहाजों में शामिल थे, जो युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए थे। पश्चिमी हिस्से में 24 और पूर्वी हिस्से में 4 जहाज थे। हाल ही में कुछ जहाज सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, लेकिन अब भी पश्चिमी हिस्से में 22 जहाज, जिन पर 611 नाविक सवार हैं, फंसे हुए हैं।
फंसे जहाजों में शामिल हैं:
वैश्विक स्तर पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। पर्शियन गल्फ में करीब 500 टैंकर फंसे हुए हैं, जिनमें 108 कच्चे तेल टैंकर, 166 ऑयल प्रोडक्ट टैंकर, 104 केमिकल/प्रोडक्ट टैंकर, 52 केमिकल टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान केवल कुछ जहाजों को सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही होर्मुज पार करने की अनुमति दे रहा है। इसके तहत जहाज की मालिकी, कार्गो और गंतव्य की जांच की जा रही है। कुछ जहाज लारक-केश्म चैनल का मार्ग हल्का बदलकर निकल रहे हैं, जो इस प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते करता है। युद्ध से पहले भारत का आधा से ज्यादा कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आता था।
हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति को रूस, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से आंशिक रूप से संतुलित किया गया है, लेकिन गैस और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
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