
दिल्ली हाईकोर्ट ने उद्योगपति और शार्क टैंक इंडिया के जज अमन गुप्ता के पक्ष में एकपक्षीय अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनके व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। अदालत ने कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संस्थाओं को बिना अनुमति उनके नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान के इस्तेमाल से रोक दिया है।
इसके साथ ही कोर्ट ने एआई-जनरेटेड डीपफेक, फर्जी प्रचार सामग्री और आपत्तिजनक पोस्ट को तुरंत हटाने के निर्देश भी दिए हैं।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अपने आदेश में कहा कि शुरुआती तौर पर यह मामला अमन गुप्ता के पंजीकृत ट्रेडमार्क और व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा प्रतीत होता है।
अदालत के अनुसार, कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनके नाम, नारे और व्यावसायिक पहचान का अनुचित लाभ उठा रहे थे।
हाईकोर्ट ने प्रतिवादी नंबर 1 और 6 से 45 तक को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अमन गुप्ता का नाम, तस्वीर, वीडियो या किसी भी पहचान से जुड़ी सामग्री का उपयोग बिना लिखित अनुमति के नहीं कर सकते।
यह प्रतिबंध एआई टूल्स और डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल पर भी लागू होगा।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति या प्लेटफॉर्म ऐसा उत्पाद या सेवा प्रमोट नहीं कर सकता जिससे यह भ्रम पैदा हो कि उसे अमन गुप्ता का समर्थन प्राप्त है।
गूगल सहित अन्य डिजिटल मध्यस्थों को ऐसे कंटेंट से जुड़े लिंक तुरंत हटाने, ब्लॉक करने और टेकडाउन करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही, संबंधित खातों से जुड़ी बुनियादी जानकारी जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी साझा करने का भी आदेश दिया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिया कपूर ने अदालत को बताया कि अमन गुप्ता का नाम और ब्रांड पहचान फर्जी इवेंट बुकिंग वेबसाइटों, नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स और एआई चैटबॉट सेवाओं में इस्तेमाल की जा रही थी।
याचिका में यह भी दावा किया गया कि कई प्लेटफॉर्म पर उन्हें भुगतान लेकर इवेंट्स के लिए उपलब्ध दिखाया जा रहा था।
मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि उनके चर्चित वाक्यांश “हम भी बना लेंगे” और “डाउन, बट नॉट आउट” का इस्तेमाल बिना अनुमति मर्चेंडाइज और अन्य उत्पादों की बिक्री में किया जा रहा था।
हाईकोर्ट ने माना कि अमन गुप्ता ने बोट लाइफस्टाइल के सह-संस्थापक और शार्क टैंक इंडिया में निवेशक के रूप में बड़ी पहचान बनाई है।
अदालत ने उनके सोशल मीडिया प्रभाव और व्यावसायिक उपलब्धियों को भी आदेश में दर्ज किया।
अदालत ने अमन गुप्ता को यह अनुमति दी है कि यदि भविष्य में कोई नया उल्लंघन सामने आता है, तो वे उसकी सूचना कोर्ट को दे सकते हैं, जिसके बाद संबंधित वेबसाइट या डोमेन पर कार्रवाई की जा सकेगी।
मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष होगी।
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