
नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि लद्दाख से जुड़े लंबे समय से लंबित वादों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और केंद्र सरकार के साथ बातचीत भी पूरी तरह ठप हो गई है।
वांगचुक ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है, जबकि उन्होंने उम्मीद की थी कि बातचीत से समाधान निकलेगा।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह स्वेच्छा से अनशन पर नहीं बैठे हैं। उनके अनुसार, यह कदम परिस्थितियों की मजबूरी है और यदि उनकी जान भी जाती है, तो भी वह अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के साथ हुई पिछली बातचीत से उम्मीद जरूर जगी थी, लेकिन उन चर्चाओं को किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया गया, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने, राज्य का दर्जा और बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसी मांगों का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर केवल आश्वासन मिला है, लेकिन वास्तविक कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने सरकार से अपील की कि इन विषयों पर संसद में गंभीर चर्चा हो और लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकाला जाए।
वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों और समर्थकों से अपील की कि वे आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखें। उन्होंने कहा कि विरोध में हिंसा या नफरत की जगह संवाद और अहिंसा होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे दबाव या डर से प्रभावित न हों।
इसी बीच सीजेपी का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर लगातार दसवें दिन भी जारी रहा। संगठन के संस्थापक अभिजीत डिपके ने हाल के छात्र आत्महत्या मामलों का जिक्र करते हुए सरकार पर संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए और इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
वांगचुक ने अपने अनशन के साथ-साथ देशभर के नागरिकों से शिक्षा सुधार, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों के समर्थन में एक दिन का प्रतीकात्मक उपवास रखने की अपील भी की है।
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