
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। इस बजट में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कल्याण, स्वरोजगार और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने सामाजिक सहायता, उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने की व्यापक योजनाएं प्रस्तुत की हैं।
बजट में अल्पसंख्यक छात्रों की उच्च शिक्षा और तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत:
25 नए पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल खोले जाएंगे, प्रत्येक में 150 छात्रों की क्षमता होगी, जबकि मौजूदा 25 हॉस्टलों में सीटें बढ़ाई जाएंगी।
10 नए संत शिशुनाल शरीफ आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे और अगले वित्त वर्ष में 25 और खोले जाएंगे।
117 मौलाना आजाद मॉडल स्कूलों और उर्दू स्कूलों को 600 करोड़ रुपये की लागत से कर्नाटक पब्लिक स्कूल के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। इसी तर्ज पर चालू वर्ष में 100 अतिरिक्त स्कूलों को 400 करोड़ रुपये में अपग्रेड किया जाएगा।
25 मोरारजी देसाई और 18 एपीजे अब्दुल कलाम आवासीय विद्यालयों में विज्ञान, वाणिज्य और कॉमर्स स्ट्रीम शुरू होगी।
चार आवासीय स्कूलों को सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि के-सीईटी, जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण कोचिंग दी जा सके।
5,000 मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को तकनीकी शिक्षा में सहायता के लिए 50,000 रुपये प्रति छात्र दिए जाएंगे।
आर्थिक सशक्तिकरण के लिए:
बेरोजगार अल्पसंख्यक युवाओं को फास्ट फूड ट्रक या मोबाइल किचन शुरू करने के लिए 75% या अधिकतम 3 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
अल्पसंख्यक महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त करने के लिए नई महिला सहकारी समितियां बनाई जाएंगी।
बेंगलुरु में 100 की क्षमता वाले चार नए हॉस्टल महिलाओं के लिए शुरू किए जाएंगे।
उच्च मांग वाले वाणिज्यिक क्षेत्रों में वक्फ संपत्तियों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल से विकसित किया जाएगा।
हज यात्रियों की सुविधा के लिए हुबली और कलबुर्गी में हज भवन बनाए जाएंगे।
वक्फ अंतर्गत आने वाले 31 महिला पीयू कॉलेजों को डिग्री कॉलेज में अपग्रेड किया जाएगा।
जैन, बौद्ध और सिख समुदायों के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
बौद्ध धर्माचारियों को 6,000 रुपये मासिक मानदेय देने की घोषणा की गई है।
हालांकि बजट के कल्याणकारी पहलुओं को लेकर तारीफें भी हो रही हैं, मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसे “तुष्टिकरण की राजनीति” करार दिया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने वोट बैंक सुनिश्चित करने के लिए राज्य के खजाने का बड़ा हिस्सा आवंटित किया है।
कर्नाटक का यह बजट अल्पसंख्यक समुदायों में शिक्षा, कौशल, उद्यमिता और बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए आर्थिक सशक्तिकरण लाने की कोशिश करता है। वक्फ संपत्तियों के PPP मॉडल आधारित विकास से राज्य के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर को भी नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, राजनीतिक विवाद के बीच इन योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सरकार के लिए चुनौती बना रहेगा।
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