
मुंबई। बैंक का लोन पूरा चुकाने के बाद अगर बैंक आपकी प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज वापस नहीं करता और वे उसकी कस्टडी में ही गुम हो जाते हैं, तो यह मामला आपके लिए अहम है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन वोग क्रिएशन्स बनाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मामले में फैसला सुनाते हुए SBI को पीड़ित फर्म को रोजाना 5,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
इन वोग क्रिएशन्स नाम की फर्म ने साल 1979 में SBI की दादर कमर्शियल ब्रांच से लोन लिया था। लोन के बदले फर्म ने मुंबई के प्रभादेवी में मौजूद दो कमर्शियल यूनिट्स और पनवेल स्थित एक प्लॉट के ओरिजिनल लीज डीड, शेयर सर्टिफिकेट्स और एग्रीमेंट्स बैंक के पास गिरवी रखे थे।
फर्म ने 28 अगस्त 2003 को अपना पूरा कर्ज चुका दिया। इसके बाद SBI ने नो ड्यूज सर्टिफिकेट भी जारी किया, लेकिन बैंक ने फर्म को उसके मूल दस्तावेज वापस नहीं किए।
बाद में जब फर्म ने अपनी प्रॉपर्टी बेचने के लिए दस्तावेज मांगे, तो SBI ने माना कि उसकी कस्टडी में रखे ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स गुम हो चुके हैं। बैंक ने अपनी सफाई में कहा कि लोन 2003 में चुका दिया गया था और फर्म ने करीब 15 साल बाद दस्तावेजों की मांग की। इस दौरान बैंक की ब्रांच भी दूसरी जगह शिफ्ट हो चुकी थी।
यह मामला पहले बैंकिंग लोकपाल के पास पहुंचा था। लोकपाल ने SBI को फर्म को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का सुझाव दिया था। बैंक ने यह रकम फर्म के खाते में ट्रांसफर भी कर दी, लेकिन फर्म ने इसे पर्याप्त नहीं माना और बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।
फर्म ने कहा कि मूल दस्तावेज नहीं होने के कारण उसे स्टैंप ड्यूटी और मालिकाना हक साबित करने में बड़ी दिक्कत हो रही थी। इसके चलते वह अपनी प्रॉपर्टी बेचने में सक्षम नहीं थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायाधीश गौतम ए. अंखाद की डिवीजन बेंच ने SBI की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि लोन चुकता होने के बाद बैंक को किसी के दस्तावेज अपने पास रखने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रांच का दूसरी जगह स्थानांतरित होना या कर्मचारियों का ट्रांसफर होना बैंक का आंतरिक मामला है। इसकी वजह से ग्राहक को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक के 13 सितंबर 2023 के सर्कुलर का भी हवाला दिया। इसके मुताबिक लोन चुकाने के 30 दिनों के भीतर दस्तावेज वापस नहीं करने पर बैंक को 5,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना देना होता है।
5,000 रुपये रोजाना मुआवजा: यह राशि 1 दिसंबर 2023 से तब तक देनी होगी, जब तक बैंक सभी सर्टिफाइड कॉपी, हलफनामे और इंडेम्निटी बॉन्ड तैयार कर फर्म को सौंप नहीं देता।
1 लाख रुपये की रकम का समायोजन: बैंक द्वारा लोकपाल के आदेश पर पहले जमा किए गए 1 लाख रुपये को कुल मुआवजे की रकम में समायोजित किया जाएगा।
12 हफ्ते में पूरी करनी होगी प्रक्रिया: SBI को दस्तावेजों को दोबारा तैयार करने और पूरी प्रक्रिया को 12 हफ्तों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
Join the conversation — your email will not be published.
Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.