
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने टैक्स भुगतान में देरी से जुड़े मामले में मशहूर फैशन डिजाइनरों अबू जानी और संदीप खोसला के खिलाफ आयकर विभाग की ओर से शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि सिर्फ टैक्स जमा करने में देरी या भुगतान में चूक को जानबूझकर की गई टैक्स चोरी नहीं माना जा सकता।
यह मामला आकलन वर्ष 2017-18 से जुड़ा है। नवंबर 2017 में अबू जानी और संदीप खोसला की कंपनी 'अबू जानी संदीप खोसला डिजाइनर्स प्राइवेट लिमिटेड' ने 15.2 लाख रुपये की आय घोषित की थी। इसके आधार पर कंपनी पर 5.27 लाख रुपये का टैक्स बनता था।
आयकर विभाग की ओर से 16 अक्टूबर 2018 को नोटिस जारी किया गया था। इसके तीन दिन बाद ही 19 अक्टूबर को कंपनी ने 5.27 लाख रुपये का पूरा टैक्स जमा कर दिया। हालांकि, इसके बावजूद दिसंबर 2018 में आयकर विभाग ने कंपनी को एक और नोटिस जारी किया।
विभाग का कहना था कि कंपनी ने नोटिस मिलने के बाद टैक्स का भुगतान किया और 1 लाख रुपये का ब्याज भी जमा नहीं किया। विभाग ने इसे जानबूझकर की गई टैक्स चोरी माना था।
सितंबर 2019 में आयकर विभाग ने डिजाइनरों के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद फरवरी 2020 में मजिस्ट्रेट ने उनके खिलाफ समन जारी किया। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अबू जानी और संदीप खोसला ने 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस रंजीतसिंहा भोसले ने कहा कि टैक्स जमा करने में देरी या चूक को अपने आप जानबूझकर की गई टैक्स चोरी नहीं कहा जा सकता। अदालत के मुताबिक, जानबूझकर टैक्स से बचने का प्रयास तभी माना जाएगा, जब इसमें कोई ऐसा "सचेत, सकारात्मक या स्पष्ट कृत्य" शामिल हो, जिसका उद्देश्य टैक्स भुगतान से बचना हो।
अदालत ने यह भी कहा कि भले ही कंपनी ने नोटिस मिलने के बाद टैक्स का भुगतान किया, लेकिन उसने टैक्स जमा कर दिया था। इसके अलावा मार्च 2020 तक उस पर लगने वाला ब्याज भी चुका दिया गया था। ऐसे में इसे टैक्स चोरी नहीं माना जा सकता।
जस्टिस भोसले ने कहा कि इस मामले में आयकर विभाग की शिकायत को आगे जारी रखना कानून की प्रक्रिया का खुला दुरुपयोग होगा। अदालत ने न्याय के हित में और प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अबू जानी और संदीप खोसला के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
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