
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव में शनिवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। ममता बनर्जी की पार्टी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनावी मैदान से हटने की घोषणा की, लेकिन कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की इच्छा के मुताबिक वह छह अक्तूबर को होने वाला उपचुनाव लड़ेंगे।
यह घटनाक्रम नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के एक दिन बाद हुआ। संचिता ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का एलान किया था।
रबीउल आलम चौधरी पहले टीएमसी विधायक रह चुके हैं। उन्होंने शनिवार दोपहर मुर्शिदाबाद स्थित अपने घर पर पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है और इन कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इतने कम समय में मतदाताओं को नए 'फुटबॉलर' चुनाव चिह्न से परिचित कराना भी बड़ी चुनौती है। चौधरी के मुताबिक, इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने पिछली रात ममता दीदी को अपने चुनाव नहीं लड़ने के फैसले की जानकारी दी थी।
हालांकि, कुछ घंटे बाद चौधरी ने जल्दबाजी में एक और प्रेस वार्ता बुलाई और चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिया है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी प्रमुख से बात की और ममता बनर्जी ने उन्हें चुनावी मैदान से हटने के बजाय चुनाव लड़ने का निर्देश दिया। चौधरी के अनुसार, वह बेलडांगा थाने के अधिकारियों से भी मिले, जहां उन्हें और उनके कार्यकर्ताओं को चुनाव प्रचार के दौरान सुरक्षा देने का भरोसा दिया गया।
उन्होंने कहा कि वह अपने पहले के फैसले को वापस ले रहे हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके किसी भी कार्यकर्ता को प्रताड़ना का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि उनके पास अगर 10 कार्यकर्ता भी हैं, तो वह जीतेंगे।
चुनाव आयोग ने ममता गुट वाली तृणमूल कांग्रेस को 'फुटबॉलर' चुनाव चिह्न आवंटित किया है। इस गुट को 'ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है। पार्टी के नाम और 'फूल-घास' चुनाव चिह्न को लेकर दूसरे गुट के साथ चल रहे विवाद के बीच यह फैसला हुआ। वहीं, अरूप राय के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया है।
ममता बनर्जी की पार्टी की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। संचिता की शिक्षक भर्ती घोटाले के कारण नौकरी चली गई थी। वह अपने पति सत्यजीत के साथ राज्य सचिवालय नबन्ना में अधिकारी से मिली थीं। इसके बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। यह कदम नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख से एक दिन पहले उठाया गया था। उनके इस फैसले की वजह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी।
नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी की पार्टी का उम्मीदवार नहीं रहने के बाद बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस को 'करीबी सहयोगी पार्टी' बताया। बनर्जी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य छह अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक को मजबूत करना है।
ममता बनर्जी के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई नंदीग्राम में 2007 में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन से जुड़े उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के संबंध में हुई। नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित है।
बनर्जी और उनके गुट ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रही है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य विरोध की आवाज को दबाना और भारी अंतर से उपचुनाव जीतना है।
इस आरोप पर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप लगाए जाने की ही उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि यह ऐसी एक व्यक्ति पर केंद्रित पार्टी है, जिसके कार्यकर्ताओं ने 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद उस समय की विपक्षी भाजपा पर हमले किए थे।
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