
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे इन दिनों राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर की जा रही कड़ी कार्रवाई के चलते चर्चा में हैं। हालांकि, मुंढे का कहना है कि लोकप्रियता उनके लिए कभी लक्ष्य नहीं रही। उनके मुताबिक, सबसे अहम मुद्दा जनस्वास्थ्य है।
बातचीत के दौरान मुंढे ने कहा कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता उनके काम में किसी तरह की रुकावट नहीं है। उन्होंने कहा, “लोकप्रियता कभी मेरा लक्ष्य नहीं रही। मेरे लिए जनस्वास्थ्य जैसे मुद्दे मायने रखते हैं। यह तुकाराम मुंढे के बारे में नहीं है, यह भारत और जनस्वास्थ्य सुधारने के लक्ष्य के बारे में है।”
मुंढे ने कहा कि खाद्य और औषधि का क्षेत्र सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। अगर उनके काम और भूमिका के कारण यह विषय लोगों के बीच चर्चा का मुद्दा बनता है तो उन्हें खुशी होगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को जनस्वास्थ्य को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखना चाहिए। उनके अनुसार, स्वस्थ मानव संसाधन के बिना भारत सुपरपावर नहीं बन सकता।
मुंढे के अनुसार, मई 2026 में एफडीए आयुक्त का पद संभालने के बाद से अब तक 12,083 संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसमें प्रतिष्ठानों को बंद करना, लाइसेंस निलंबित या रद्द करना और आपराधिक मामले दर्ज करना शामिल है।
उन्होंने बताया कि 5,269 संस्थाओं को सुधार नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि 603 संस्थाओं के खिलाफ निलंबन आदेश दिए गए हैं। मुंढे के मुताबिक, होटल, रेस्तरां और खाने-पीने से जुड़े प्रतिष्ठानों में 1,803 निरीक्षण किए गए। इनमें 948 मामलों में सुधार नोटिस जारी किए गए, जबकि 199 लाइसेंस निलंबित किए गए।
उनके मुताबिक, रेस्तरां में खाद्य सुरक्षा से जुड़े सबसे आम उल्लंघनों में स्वच्छता और निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं करना, खराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल का इस्तेमाल और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी शामिल है।
स्विगी और जोमैटो जैसी ऑनलाइन फूड ऑर्डर और डिलीवरी कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर मुंढे ने कहा कि कानून के तहत ये कंपनियां भी फूड बिजनेस ऑपरेटर हैं। उनके अनुसार, इन कंपनियों के गोदाम भी मौजूद हैं और एफडीए ने इनके खिलाफ कार्रवाई की है।
मुंढे ने बताया कि उनके कार्यकाल में अलग-अलग नियमों के उल्लंघन के मामलों में 740 फार्मेसियों के लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में घटिया और नकली दवाओं की समस्या मौजूद है, लेकिन इसकी सही संख्या निर्धारित करना मुश्किल है।
उन्होंने अधिकारियों से केवल औपचारिक निरीक्षण करने के बजाय दवा निर्माण की प्रक्रिया का विस्तृत ऑडिट करने को कहा है।
मुंढे ने बताया कि ऑनलाइन फार्मेसियों और दवा डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर भी निगरानी रखी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऑनलाइन दवाओं की बिक्री प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन ऐसी कंपनियों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम और संबंधित नियमों का पालन करना होगा।
एफडीए ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को इलायची के विज्ञापन में नजर आने को लेकर नोटिस जारी किए हैं। एफडीए को आशंका है कि यह प्रतिबंधित पान के विज्ञापन का सरोगेट प्रमोशन हो सकता है।
मुंढे ने बताया कि इनमें से दो लोगों की ओर से अब तक जवाब दिया जा चुका है। वहीं, तीनों को जवाब देने के लिए दी गई 30 दिन की समयसीमा अभी पूरी नहीं हुई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा एफडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में मुंढे ने कहा कि इस मामले में कोई बड़ी प्रक्रियात्मक गलती नहीं हुई थी। उन्होंने इसे एक छोटी गलती बताया।
एफडीए ने पुणे स्थित सिप्ला की इकाई में दवाओं के भंडारण और रखरखाव में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किए थे। मुंढे के अनुसार, एक अधिकारी ने कंपनी को अपना पक्ष रखने का आखिरी मौका दिया था, लेकिन सुनवाई सार्वजनिक अवकाश के दिन निर्धारित की गई थी।
इसके बाद नोटिस दोबारा जारी किया गया है और मामले पर फैसला लिया जा रहा है।
मुंढे ने कहा कि एफडीए कानून के अनुसार काम कर रहा है और मौजूदा एसओपी में बदलाव की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अगर किसी तरह की प्रक्रियात्मक गलती होती है तो उसे गंभीरता से लिया जाता है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल एफडीए की प्रयोगशालाएं पर्याप्त हैं, लेकिन उनकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से राज्य में चार नई प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है।
मुंढे के अनुसार, स्टाफिंग पैटर्न से संबंधित प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। उनके मुताबिक, स्वीकृत पदों में से अधिकांश पद भरे जा चुके हैं। हालांकि, ड्रग इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती परीक्षा रद्द होने के कारण रिक्तियां बनी हुई हैं।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने एफडीए में ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) के पदों पर भर्ती के लिए मार्च में परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता भंग होने के बाद इसे रद्द कर दिया गया।
इस मामले में प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आरोपों को लेकर अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुंढे के मुताबिक, महाराष्ट्र में खाद्य और दवा सुरक्षा को लेकर की जा रही कार्रवाई का मकसद किसी व्यक्ति की लोकप्रियता बढ़ाना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य में सुधार करना है।
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