
पीओके में लगातार बिगड़ते हालात से ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तान ने एक नई रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। पाकिस्तान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण दरा शेर खान, सहरा, नतीर और बटाल मार्गों पर सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं। इससे भारत के पुंछ और मेंढर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि भारतीय सैन्य बल इन इलाकों में पहले से ही पूरी तरह सतर्क और मजबूत स्थिति में मौजूद हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान इस मार्ग के जरिए सीमा पर तैनात अपने सैनिकों तक बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, रसद और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने में लगा हुआ है। इससे पहले भी पाकिस्तान द्वारा सीमा क्षेत्र में चीन निर्मित एसएच-15 स्वचलित तोपों की तैनाती की जानकारी सामने आई थी। अब बुधवार को इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी की बात सामने आई है। हाल के दिनों में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का इस इलाके का दौरा भी हो चुका है।
यह इलाका पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के महत्वपूर्ण हिस्से में आता है। इस मार्ग के शुरू होने से पाकिस्तानी सेना एलओसी की अग्रिम चौकियों तक कम समय में बड़ी संख्या में सैनिक और भारी रसद पहुंचाने में सक्षम हो सकती है।
तनाव या युद्ध जैसी स्थिति में पाकिस्तान इस मार्ग का इस्तेमाल भारी हथियारों और तोपों को भारत के पुंछ और राजौरी जैसे संवेदनशील इलाकों के सामने तैनात करने के लिए कर सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान इस रास्ते का उपयोग भारत के खिलाफ छद्म युद्ध को जारी रखने के लिए भी करता है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना आतंकवादियों तक हथियारों की खेप पहुंचाने के लिए भी इस मार्ग का इस्तेमाल करती है। इस इलाके में कई आतंकी लॉन्च पैड मौजूद होने की बात भी सामने आती रही है। इसी वजह से भारतीय सेना को इस क्षेत्र में लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।
इस मार्ग से जुड़े ऊंचे पर्वतीय इलाकों का इस्तेमाल पाकिस्तान भारतीय सेना की चौकियों और पुंछ-राजौरी के नागरिक क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए करता है।
पाकिस्तानी रक्षा मामलों के जानकार शंत शर्मा के अनुसार, इस सड़क के समानांतर पाकिस्तानी सेना ने अपने सैन्य संचार टावर और रडार सिस्टम लगाए हैं। यह सड़क भारत के पुंछ-राजौरी और मेंढर सेक्टर के सामने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के समानांतर गुजरती है।
दरा शेर खान और सहरा की कुछ ऊंची पहाड़ियां भारत के महत्वपूर्ण पुंछ-जम्मू हाईवे और सैन्य ठिकानों के बिल्कुल सामने स्थित हैं। इस मार्ग के सक्रिय रहने से पाकिस्तान इन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अपनी निगरानी और रसद व्यवस्था को मजबूत बनाए रखता है।
इसके जरिए पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में भारत की मुख्य सप्लाई लाइन (एनएच-144ए) को निशाना बनाने की कोशिश भी कर सकता है।
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