
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर राजनीतिक दलों को कमजोर करने और सत्ता हासिल करने के लिए कथित तौर पर पर्दे के पीछे से राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करने के अपने वादे को अब तक पूरा नहीं किया है।
जम्मू में आयोजित एक जनसभा में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बीजेपी नेताओं के उन दावों पर भरोसा करना मुश्किल है, जिनमें वे नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार को अस्थिर करने की बात से इनकार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी कई राज्यों में विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां बीजेपी को सीधे तौर पर सत्ता नहीं मिलती, वहां वह दूसरे तरीकों से राजनीतिक बढ़त हासिल करने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने चुनाव प्रक्रिया, केंद्र सरकार, संसद और सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए भरोसे के आधार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया था।
उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग को लेकर 20 जुलाई से दिल्ली में आंदोलन का नया चरण शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पर्याप्त समय दिया गया और करीब दो साल तक बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन अब पार्टी अपनी मांग को लेकर जनता के बीच जाएगी।
उन्होंने कहा कि अगर अपनी मांग देश की राजधानी में नहीं उठाएंगे तो फिर कहां जाएंगे। नेशनल कॉन्फ्रेंस केवल केंद्र सरकार से किए गए वादों को पूरा करने की मांग कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के बाद काफी समय बीत चुका है, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपनी जिम्मेदारी निभा रही है और अब बीजेपी को स्पष्ट करना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा कब वापस मिलेगा। खेल मंत्री सतीश शर्मा ने भी कहा कि राज्य का दर्जा बहाल होने से जम्मू-कश्मीर और देश दोनों मजबूत होंगे।
उमर अब्दुल्ला के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया। बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ किसी भी गतिविधि में विश्वास नहीं करती।
उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को अपने विधायकों के टूटने का डर है तो उसे अपनी पार्टी और नेतृत्व पर आत्ममंथन करना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी उमर अब्दुल्ला से आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने या माफी मांगने की मांग की।
बीजेपी नेता आरएस पठानिया ने कहा कि यदि आरोप साबित नहीं किए जाते हैं तो पार्टी कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है।
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक को निमंत्रण दिए जाने पर उठे विवाद पर भी उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 50 से अधिक लोगों को निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन केवल एक नाम को लेकर विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और कुछ मीडिया संस्थान राज्य दर्जे की मांग से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग राज्य दर्जे की बहाली की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते रहेंगे और यह लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी।
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