
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 20 जनवरी को नई राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026 का मसौदा जारी किया है। नीति को तैयार करने का उद्देश्य बिजली क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाना बताया गया है।
ड्राफ्ट के मुताबिक, यदि राज्य बिजली नियामक आयोग समय पर बिजली दरों का आदेश जारी नहीं करता है, तो टैरिफ अपने आप महंगाई सूचकांक के आधार पर बढ़ जाएगा। यह नया प्रावधान वित्त वर्ष 2026-27 से लागू करने का प्रस्ताव है।
बिजली कंपनी को पहले नियामक आयोग में आवेदन करना होगा ताकि नई दरें तय की जा सकें। यदि कंपनी समय पर आवेदन दे देती है और आयोग 120 दिनों के भीतर फैसला नहीं करता है, तभी टैरिफ अपने आप बढ़ेगा। अगर आयोग समय पर आदेश जारी कर देता है या कंपनी ने आवेदन ही नहीं किया, तो कोई ऑटो बढ़ोतरी नहीं होगी।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नियामकीय देरी के कारण बिजली कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ता है। ऑटोमैटिक बढ़ोतरी कंपनियों को अस्थायी वित्तीय राहत देने का तरीका है।
हालांकि, उपभोक्ता संगठन इस प्रावधान के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि यह नियम नियामक आयोग की कानूनी शक्तियों को कमजोर करता है और बिना आयोग की मंजूरी के टैरिफ बढ़ाने का रास्ता खोलता है, जो सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के हितों को प्रभावित कर सकता है।
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