
मुजफ्फरनगर: साइबर क्राइम थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के अहम सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के बाद उसके बैंक खातों से साइबर ठगी से जुड़े करीब 31 लाख 71 हजार 950 रुपये के लेनदेन की पुष्टि हुई है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज लगभग 20 शिकायतों में इस गिरोह द्वारा करीब 31 करोड़ 95 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।

यह कार्रवाई एसएसपी संजय कुमार वर्मा के निर्देश, एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण और साइबर क्राइम थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में की गई।
एसएसपी के अनुसार, गृह मंत्रालय के “प्रतिबिंब” पोर्टल पर मिली शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में पाया गया कि डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए कई मोबाइल नंबर और बैंक खाते मुजफ्फरनगर से ऑपरेट हो रहे थे। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
इस मामले में पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी रिहान पुत्र मोहम्मद मेहराज, निवासी मक्कीनगर थाना खालापार, लंबे समय से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित था। मंगलवार को पुलिस को मिली सूचना के आधार पर उसे पकड़ लिया गया।
पूछताछ में आरोपी रिहान ने स्वीकार किया कि उसने मयूर अफजल राणा के कहने पर अपने नाम से कई बैंक खाते खुलवाए थे। इसके अलावा “रिहान ट्रांसपोर्ट” नाम से एक फर्जी फर्म बनाकर उसी के नाम पर बैंक खाता संचालित किया गया।

आरोपी के मुताबिक यह फर्म सिर्फ कागजों पर मौजूद थी और इसका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम इकट्ठा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। वह खातों में आने वाली रकम को बैंक, एटीएम और जनसेवा केंद्रों के जरिए निकालकर आगे सौंप देता था।
इसके बदले उसे प्रति बैंक खाता 60 हजार रुपये और हर ट्रांजैक्शन पर अलग से कमीशन मिलता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
Join the conversation — your email will not be published.
Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.