
बस्तर संभाग मुख्यालय में बुधवार दोपहर 108 नक्सलियों ने अपने हथियार सौंपते हुए नक्सली विचारधारा को छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इतने बड़ी संख्या में समर्पण होने से नक्सली संगठन को भारी झटका लगा है। पुलिस अब सौंपे गए हथियारों की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये हथियार किन घटनाओं में लूटे गए थे।
पुलिस का प्रारंभिक आकलन
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि ज्यादातर हथियार नक्सलियों ने या तो मुठभेड़ों में शहीद हुए जवानों से छीने थे या घायल जवानों से बरामद किए थे। डीजीपी अरुण देव गौतम को 101 हथियार सौंपे गए, जिनमें 7 AK-47, 10 INSAS राइफल, 5 SLR, 4 LMG, 20 .303 राइफल और 11 BGL लांचर शामिल हैं। पुलिस अब घटनाओं के रिकॉर्ड से हथियारों को मैच कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कौन सा हथियार किस मुठभेड़ या घटना में इस्तेमाल हुआ था।
समर्पण के पीछे प्रमुख नक्सली कैडर
इस समर्पण में दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के पश्चिम बस्तर डिवीजन के DVCM राहूल तेलाम, पण्डरु कोवासी, झितरु ओयाम, पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी के DVCM रामधर उर्फ बीरु, उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी के DVCM मल्लेश, PLGA बटालियन नंबर 01 के CYPC कमांडर मुचाकी और आंध्रा-ओडिशा बार्डर (AOB) के DVCM कोसा मंडावी जैसे वरिष्ठ नक्सली शामिल थे।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की योजना
आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि सभी हथियारों की जांच जारी है। प्रारंभिक निष्कर्ष से स्पष्ट है कि सौंपे गए अधिकांश हथियार जवानों से ही लूटे गए हैं। जांच के बाद ही यह तय किया जाएगा कि कौन से हथियार किन मुठभेड़ों और घटनाओं में इस्तेमाल हुए थे। उनका कहना था कि यह समर्पण न केवल हथियारों की बरामदगी बल्कि कमजोर हुए नक्सली संगठन को भी गंभीर झटका है।
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