
मुजफ्फरनगर की पौराणिक एवं धार्मिक नगरी शुकतीर्थ से रविवार को एक अत्यंत दुखद समाचार सामने आया। हनुमंतधाम आश्रम के अधिष्ठाता एवं महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद सरस्वती महाराज रविवार तड़के ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने सुबह करीब 3:30 बजे मुजफ्फरनगर के आरोग्यम अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही संत समाज, श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों में शोक की लहर दौड़ गई।
स्वामी जी महाराज के अंतिम दर्शन के लिए हनुमंतधाम आश्रम में सुबह से ही श्रद्धालुओं, साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों का पहुंचना शुरू हो गया। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने आश्रम पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य लोग मौजूद रहे। महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज, स्वामी विनय स्वरूपानंद महाराज, स्वामी गीतानंद महाराज, स्वामी आनंद स्वरूप महाराज और अन्य संतों ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
स्वामी केशवानंद सरस्वती महाराज लंबे समय से शुकतीर्थ की धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहे। वे वर्ष 1970 में शुकतीर्थ आए थे और वर्ष 1987 में हनुमंतधाम आश्रम की स्थापना की थी। उनके सानिध्य में आश्रम ने देशभर में विशेष पहचान बनाई।
उन्होंने शुकतीर्थ को धार्मिक पर्यटन और सनातन संस्कृति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। विश्व प्रसिद्ध नक्षत्र वाटिका की स्थापना भी उनके प्रमुख कार्यों में शामिल रही। संत समाज का मानना है कि उनके ब्रह्मलीन होने से सनातन परंपरा और शुकतीर्थ को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
आश्रम प्रबंधन के अनुसार, स्वामी जी महाराज का अंतिम संस्कार संत परंपराओं के अनुसार भू-समाधि के रूप में किया जाएगा। रविवार शाम पांच बजे हनुमंतधाम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण और अखाड़े की परंपराओं के बीच समाधि प्रक्रिया संपन्न होगी।
श्रद्धालुओं का कहना है कि स्वामी केशवानंद सरस्वती महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, अध्यात्म और समाज सेवा को समर्पित किया। उनका सानिध्य और मार्गदर्शन सदैव श्रद्धालुओं को प्रेरित करता रहेगा।
महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद जी महाराज के श्रीचरणों में शत शत नमन् !
श्री हनुमत धाम शुकतीर्थ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद सरस्वती का 17 मई, 2026 को निजधाम गमन हो गया। उनके स्वर्गारोहण के दुःखद समाचार से देशभर के करोड़ों हनुमत प्रेमियों को अपार पीड़ा पहुंची है।
महाराज श्री ने सनातन की धर्मध्वजा को ऊंचा करने में अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे त्याग, करुणा, स्नेह , निःस्वार्थ सेवा की साक्षात मूर्ति थे। लाखों लोगों की भांति मुझे भी महाराज श्री का आशीर्वाद मिलता रहा, जिसके लिए मैं जीवनभर ऋणी रहूंगा। उनके श्रीचरणों में कोटिश नमन ! - गोविंद वर्मा (संपादक 'देहात')
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