
नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और उसके आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। भारत ने इस्लामाबाद पर दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर का विकास पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के बिल्कुल विपरीत दिशा में हो रहा है।
23 फरवरी से 31 मार्च तक जारी इस सत्र के 25 फरवरी के उच्च स्तरीय सत्र में भारत की प्रतिनिधि अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और ओआईसी (OIC) द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस समूह ने अपने मंच का उपयोग किसी सदस्य देश के विरोध में ‘प्रतिबिंब कक्ष’ के रूप में किया है।
सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है और पाकिस्तान का लगातार फैलाया गया दुष्प्रचार ईर्ष्या और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। उन्होंने जम्मू और कश्मीर को लेकर भारत की स्थायी स्थिति दोहराई, कहा कि यह प्रदेश “भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।”
अनुपमा सिंह ने स्पष्ट किया कि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, 1947 में जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय पूरी तरह से वैध और अपरिवर्तनीय था। उन्होंने कहा,
"इस क्षेत्र से संबंधित एकमात्र लंबित विवाद पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा है। इस्लामाबाद को अपने नियंत्रण वाले हिस्सों को खाली करना चाहिए।"
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