
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। यह कदम एफएसएस एक्ट के तहत एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 और लैक्टोजेन प्रो 1 शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने के मामले में उठाया गया है।
एफएसएसएआई ने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध इन उत्पादों और उनकी प्रचार सामग्री की जांच की गई। एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के संबंध में नियामक ने 5 एचएमओ और व्हे प्रोटीन से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई। वहीं, लैक्टोजेन प्रो 1 के मामले में उत्पाद में मौजूद व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने के दावे पर चिंता जताई गई।
एफएसएसएआई के मुताबिक, दोनों उत्पाद 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (शिशुओं के पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) रेगुलेशन, 2020' के रेगुलेशन 4(2) का उल्लंघन करते पाए गए। इस नियम के तहत शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाने वाले प्रचार और दावों पर रोक है।
नियामक ने 'इन्फैंट मिल्क सब्स्टिट्यूट्स, फींडिंग बॉटल्स एंड इन्फैंट फ़ूड्स (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का नियमन) एक्ट, 1992' की धारा 3 का भी उल्लेख किया है। यह धारा ऐसे उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाती है।
एफएसएसएआई ने कहा कि इन दावों को लेकर नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके अलावा, लैब जांच के दौरान नेस्ले इंडिया द्वारा तैयार किए गए एक 'फॉलो-अप फॉर्मूला' के सैंपल में बायोटिन की मात्रा मानक के अनुरूप नहीं पाई गई।
सैंपल को दोबारा जांच के लिए भेजा गया। हालांकि, रेफरल लैब की जांच में भी यह 2020 के नियमों के तहत निर्धारित बायोटिन की जरूरत के अनुरूप नहीं पाया गया।
इन कथित उल्लंघनों के आधार पर एफएसएसएआई ने बताया कि संबंधित उत्पादों को लेकर नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में प्रमोशनल दावों के साथ-साथ बायोटिन की मात्रा से जुड़ी लैब जांच भी शामिल है।
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