
नई दिल्ली। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और देश की युवा शक्ति को लेकर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस समय अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का वास्तविक समय में अनुभव कर रहा है। देश डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में दुनिया में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यूपीआई के माध्यम से अरबों लेनदेन किए जा रहे हैं। भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वहीं, अंतरिक्ष क्षेत्र में भी देश नए आयाम स्थापित कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान निर्मला सीतारमण ने विरोधी दलों और जनसांख्यिकीय लाभांश को लेकर संशय जताने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से इस्तेमाल किए गए शब्द 'नाराज फूफाजी' का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को हमेशा निराशावादी नजरिए से देखते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भारत की विकास गति और युवाओं की क्षमता पर सवाल उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। उनके पास ऐसा करने के लिए कारणों की कभी कमी नहीं होती। वे टेलीविजन स्टूडियो में बहस करते हुए अपना समय बिताते हैं और यह सवाल उठाते हैं कि क्या भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश हाथ से निकल गया है या फिर यह देश के लिए बोझ बन गया है।
वित्त मंत्री ने भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को बोझ मानने वाली सोच को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यही जनसांख्यिकीय लाभांश भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा तय कर रहा है।
उन्होंने इस प्रगति का उत्सव मनाने की बात कही और नकारात्मक सोच रखने वालों की तरह नहीं बनने पर जोर दिया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यह देश के भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।
निर्मला सीतारमण ने एक संघीय उद्योग मंच तैयार करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, यह मंच व्यापक भारतीय प्रौद्योगिकी परिवेश को एक साथ लाने का काम करेगा।
उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक को थोक और खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा के पायलट को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। इससे डिजिटल वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को दोधारी तलवार बताया। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल धोखाधड़ी का पता लगाने में किया जा सकता है, लेकिन इसका उपयोग धोखाधड़ी करने के लिए भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नवाचार से दक्षता बढ़े, लेकिन इसके साथ नई प्रणालीगत नाजुकता पैदा न हो। प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल सावधानी और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
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