
मुजफ्फरनगर। काली नदी के पास 400 गज से अधिक के प्लॉट की खरीद-फरोख्त और लेनदेन को लेकर विवाद सामने आया है। कश्यप विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कश्यप बुधवार सुबह करीब 10 बजे अपने समर्थकों के साथ SSP कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने प्रार्थना पत्र देकर मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की। नवीन कश्यप ने शिवसेना (शिंदे गुट) के जिला प्रमुख बिट्टू सिखेड़ा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, बिट्टू सिखेड़ा ने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए नवीन कश्यप पर ही आरोप लगाए हैं।
नवीन कश्यप का आरोप है कि बिट्टू सिखेड़ा उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं और देर रात फोन करके अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उनका दावा है कि काली नदी के पास 400 गज से अधिक जमीन के सौदे में बिट्टू सिखेड़ा ने करोड़ों रुपये कमाए हैं, जबकि उनके करीब 10 लाख रुपये दबाए हुए हैं। नवीन कश्यप के मुताबिक, जमीन का बैनामा होने के बावजूद उन्हें न तो कब्जा दिया जा रहा है और न ही रकम लौटाई जा रही है। उन्होंने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, बिट्टू सिखेड़ा जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और नवीन कश्यप के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि काली नदी के पास स्थित इस प्लॉट में उनकी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसे उन्होंने नियमानुसार खरीदा था। बिट्टू सिखेड़ा के अनुसार, नवीन कश्यप कोर्ट में मुकदमा हारने के बाद प्लॉट को चोरी-छिपे बेच चुके हैं। उनका दावा है कि खरीदारों ने जब अपने पैसे वापस मांगे तो रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई।
बिट्टू सिखेड़ा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि नवीन ने प्रदीप, अपने बेटे लक्ष्य और तेजपाल के नाम चेक ले रखे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तीसरे पार्टनर को कथित तौर पर धोखे में रखकर उसका हिस्सा हड़प लिया गया।
बिट्टू सिखेड़ा ने कहा कि अगर नवीन कश्यप उनके साथ एक रुपये के लेनदेन का भी प्रमाण पेश कर दें तो वह कथित 10 लाख रुपये के बदले 20 लाख रुपये देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई से बचने और मामले को दूसरी दिशा में ले जाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ बयानबाजी की जा रही है। बिट्टू सिखेड़ा ने कहा कि गलत आरोपों के खिलाफ वह न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
फिलहाल, जमीन के स्वामित्व, हिस्सेदारी, लेनदेन और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और कानूनी कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
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