
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के क्लाइमैक्स सीन में महाराणा प्रताप को समर्पित गाने ‘शूरवीर’ के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। अदालत ने सवाल किया कि क्या अब हम हिंसा का सम्मान करने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे ‘अच्छे स्वाद’ वाला नहीं बताया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ प्रशांत कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
किसने बनाया है ‘शूरवीर’ गाना?
याचिका में कहा गया है कि राजस्थानी कलाकार रैपरिया बालम ने महाराणा प्रताप की वीरता को श्रद्धांजलि देने के लिए यह गाना बनाया था। आरोप है कि फिल्म में इस गाने को काल्पनिक गैंगस्टरों से जुड़े हिंसक दृश्यों के बैकग्राउंड में इस्तेमाल किया गया है। याचिका के मुताबिक, इससे ऐतिहासिक व्यक्तित्व की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
एक सप्ताह में फैसला लेने की बात
फिल्म के निर्माताओं एक्सेल एंटरटेनमेंट की ओर से अदालत को बताया गया कि गाने का महाराणा प्रताप से कोई तुलनात्मक संबंध नहीं है। निर्माताओं ने यह भी कहा कि वे सीबीएफसी के सामने गाने को बैकग्राउंड म्यूजिक से बदलने का प्रस्ताव पहले ही भेज चुके हैं।
सीबीएफसी के वकील ने अदालत को बताया कि इस प्रस्ताव पर एक सप्ताह के भीतर फैसला लिया जाएगा।
24 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने सीबीएफसी को निर्देश दिया कि निर्माताओं की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर एक सप्ताह के अंदर निर्णय लिया जाए। इस मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार से संपर्क कर सकता है।
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