
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में मेकेदातु बांध विवाद और कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
विधानसभा में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय से सवाल किया कि सरकार को सदन में यह स्पष्ट करना चाहिए कि कर्नाटक को मेकेदातु डैम परियोजना पर आगे बढ़ने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
उदयनिधि स्टालिन के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि वह राज्य के किसानों और जनता के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जो भी जरूरी होगा, वह किया जाएगा।
कर्नाटक के साथ बातचीत के अपने प्रस्ताव का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि अगर तमिलनाडु की जनता के हित के लिए उन्हें अपमान भी सहना पड़े तो वह इसके लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि विधानसभा में मेकेदातु बांध के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था और उन्होंने इस परियोजना का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था।
इसके बाद उन्होंने DMK पर निशाना साधते हुए कहा कि 1969 में उनकी सरकार ने ही सबसे पहले कर्नाटक की इस परियोजना को मंजूरी दी थी।
उदयनिधि स्टालिन ने मेकेदातु मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने को लेकर टीवीके सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कर्नाटक की राजनीतिक पार्टियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सभी दल एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आए।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने सर्वदलीय बैठक बुलाई और सभी दल एक टीम के रूप में साथ खड़े हुए।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सवाल किया कि तमिलनाडु के हितों की रक्षा और एकजुटता दिखाने के लिए टीवीके सरकार सर्वदलीय बैठक आयोजित करने से पीछे क्यों हट रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के कर्नाटक के बेंगलुरु जाने के प्रस्ताव पर भी हमला बोला। स्टालिन ने कहा कि सरकार ने पहले मुख्यमंत्री के बेंगलुरु दौरे की योजना लीक की, लेकिन विरोध के बाद मुख्यमंत्री ने ऐसी किसी योजना से इनकार कर दिया।
बताया गया कि मुख्यमंत्री विजय के बेंगलुरु दौरे का प्रस्ताव था, लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उनसे दौरा टालने का अनुरोध किया था।
शिवकुमार ने कावेरी जल विवाद को लेकर बढ़े तनाव और जारी विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया था। साथ ही उन्होंने माहौल अनुकूल होने पर विजय को कावेरी बेसिन के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने का निमंत्रण दिया था।
कर्नाटक दौरे के अपने प्रस्ताव का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि पड़ोसी राज्य से बातचीत करने में क्या गलत है।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि जब शत्रु देश भी बातचीत के माध्यम से विवादों का समाधान तलाश सकते हैं, तो पड़ोसी राज्य के साथ संवाद करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर तमिलनाडु की जनता के हित के लिए उन्हें अपमानित भी होना पड़े, तो वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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