
बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने जिनेवा में अपनी 11वीं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें बलूचिस्तान के मानवाधिकार मुद्दों को वैश्विक मंच पर उजागर किया गया। यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान हुआ, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता और विशेषज्ञ शामिल हुए।
सम्मेलन में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में लंबे समय से मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दिया जाए।
प्रतिभागियों ने बताया कि बलूच कार्यकर्ता 27 मार्च को उस दिन के रूप में याद करते हैं, जब 1948 में बलूचिस्तान पर कथित जबर्दस्ती कब्जा किया गया। उनका कहना है कि इसके बाद से क्षेत्र के लोग लगातार दमन और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।
सम्मेलन में यह भी दावा किया गया कि बलूचिस्तान में सैकड़ों युवाओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जबरन गायब किया गया, उन्हें यातनाएं दी गईं और कुछ की हत्या कर दी गई। हालांकि, पाकिस्तान इन आरोपों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बार-बार खारिज करता रहा है।
बीएनएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान में हालात पर ध्यान देने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही संगठन ने बलूच लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की भी वकालत की।
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